मैं भगवान् हूँ
मैं नींद हूँ, मैं चैन हूँ
मैं इंसान का अभिमान हूँ
मैं भगवान् हूँ।
धरती डोलती है जिसपर, ग्रह घूमते हैं जहाँ
मैं उस अंतरिक्ष का यान हूँ
मैं भगवान् हूँ।
मैं सूर्य की तेज में, मैं वर्षा की बूंदों में
मैं उस मिट्टी की खुशबु में एक समान हूँ
मैं भगवान् हूँ।
मैं क्रोध में, मैं शांति में
मैं ही प्रेम में सत्यमान हूँ
मैं भगवान् हूँ।
मैं पापियों में, मैं राक्षसों में
मैं निर्दयी में भी चैतन्यवान् हूँ
मैं भगवान् हूँ।
मैं ही शिव, मैं ही ब्रह्मा
मैं वो रामप्रिय हनुमान हूँ
मैं भगवान् हूँ।
मैं ही चेतना में, मैं ही माया में
मैं हमेसा गतिमान हूँ
मैं भगवान् हूँ।
जिसके इशारे पर बदलती है प्रकृति,
जिसके तांडव से डगमगा उठती है धरती
जिसकी साँसों से गरजते हैं मेघ
मैं तीनों लोकों में सर्व शक्तिमान हूँ
मैं भगवान् हूँ।
मैं ही कर्ता, मैं ही नाशक
मैं एक जीव का जिवंदान हूँ
मैं भगवान् हूँ।
मैं ही धर्म, मैं ही अधर्म
मैं सत्यवान हूँ
मैं भगवान् हूँ।
मैं शक्ति हूँ, मैं विद्या हूँ
मैं कण कण में विद्यमान हूँ,
मैं भगवान् हूँ।

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